Student life

हम कहते हैं छात्र जीवन क्या है। लेकिन यहाँ पर एक बात समझनी होगी की छात्र जीवन को कोई समझ नही पाया है। छात्र जीवन मे एक लड़का ब्रह्मचर्य का पालन करता है। हिन्दू धर्म मे इसे विधारम्भ संस्कार के नाम से जाना जाता है। छात्र अपने जीवन में अनेक तरह की परेशानियों को सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास करता रहता है। छात्र आजकल बाहरी आकर्षण के चक्कर मे पड़ जाते हैं।छात्र आजकल वासना को भड़काने वाली चीजों को सेवन करने पर आमादा हैं। आज जहाँ छात्र को अपने जीवन के अहम् लक्ष्य को पाने का प्रयास करना चाहिये जबकि वाह बाहरी मोह में पड़ा हुआ है।यह छात्र जीवन का गिरता हुआ स्तर हैं। हमें सभी बातों पर अम्ल करना होगा अन्यथा यह छात्र जीवन का गिरता हुआ स्तर हमारे संस्कृति को सभ्य बनाने के बजाय असभ्य के राह पर चल पड़ेगा। जो हममें से किसी को यह मंजूर नही हैं। पहले इन्ही सब बातों को ध्यान मे रखकर बालक मुंडन कराकर शिक्षा जगत मे प्रवेश करता था। जो चीज वासना भड़काये उन चीजों का सेवन प्रतिबंधित था। उन्हें माँस,मदिरा सेवन , प्याज ओर लहसुन आदि के सेवन मना था।

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